🕉️ श्री गणेशाय नमः 🕉️
भगवान श्री गणेश विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति हैं। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनकी आराधना के बिना अधूरी मानी जाती है। इस पृष्ठ पर हमने आपके लिए भगवान गणेश के सबसे प्रभावशाली मंत्र और स्तोत्र संकलित किए हैं।
🚩 मंगलाचरण (प्रार्थना)
किसी भी कार्य के प्रारंभ में इस श्लोक का गान करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
- अर्थ: टेढ़ी सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव, मेरे सभी कार्यों को हमेशा बाधा रहित संपन्न करें।
📿 महत्वपूर्ण मंत्र (Mantras)
1. सिद्धिविनायक मूल मंत्र
॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥
- लाभ: यह मंत्र कार्यों में सफलता और मानसिक शांति के लिए सर्वोत्तम है।
2. गणेश गायत्री मंत्र
॥ ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात् ॥
- लाभ: बुद्धि की शुद्धि और ज्ञान प्राप्ति के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है।
✨ संकट नाशन गणेश स्तोत्र (Sankat Nashak Stotra)
🕉️ संकटनाशन गणेश स्तोत्र
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यं आयुःकामार्थसिद्धये॥१॥
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्॥२॥
लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्टमम्॥३॥
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्॥४॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो॥५॥
विद्यार्थी लभते विद्या धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम्॥६॥
जपेद् गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः॥७॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत्।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः॥८॥
🌼 विशेष महत्व
विद्यार्थियों, व्यापारियों और गृहस्थों के लिए विशेष फलदायक
यह स्तोत्र विघ्नों को दूर करने वाला माना जाता है
रोज़ सुबह-शाम या किसी भी शुभ कार्य से पहले पढ़ना लाभकारी है
🕉️ श्री गणपति अथर्वशीर्ष
ॐ नमस्ते गणपतये।
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि।
त्वमेव केवलं कर्ताऽसि।
त्वमेव केवलं धर्ताऽसि।
त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।
त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम्॥१॥
ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि॥२॥
अव त्वं माम्।
अव वक्तारम्।
अव श्रोतारम्।
अव दातारम्।
अव धातारम्।
अवानूचानमव शिष्यम्।
अव पश्चात्तात्।
अव पुरस्तात्।
अवोत्तरात्तात्।
अव दक्षिणात्तात्।
अव चोर्ध्वात्तात्।
अवाधरात्तात्।
सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात्॥३॥
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः।
त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः।
त्वं सच्चिदानन्दाद्वितीयोऽसि।
त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि॥४॥
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते।
सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।
सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।
सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति।
त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः।
त्वं चत्वारि वाक्पदानि॥५॥
त्वं गुणत्रयातीतः।
त्वं अवस्थात्रयातीतः।
त्वं देहत्रयातीतः।
त्वं कालत्रयातीतः।
त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम्।
त्वं शक्तित्रयात्मकः।
त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम्।
त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमाः।
त्वं ब्रह्म भूर्भुवः स्वरोम्॥६॥
गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनन्तरम्।
अनुस्वारः परतरः। अर्धेन्दुलसितम्।
तारेण ऋद्धम्।
एतत्तव मनुस्वरूपम्।
गकारः पूर्वरूपम्।
अकारो मध्यमरूपम्।
अनुस्वारश्चान्त्यरूपम्।
बिन्दुरुत्तररूपम्।
नादः सन्धानम्।
संहिता सन्धिः।
सैषा गणेशविद्या।
गणक ऋषिः।
निचृद्गायत्री छन्दः।
गणपतिर्देवता।
ॐ गं गणपतये नमः॥७॥
एकदन्ताय विद्महे।
वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥८॥
एकदन्तं चतुर्हस्तं पाशमङ्कुशधारिणम्।
रदं च वरदं हस्तैर्बिभ्राणं मूषकध्वजम्।
रक्तं लम्बोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।
रक्तगन्धानुलिप्ताङ्गं रक्तपुष्पैः सुपूजितम्॥९॥
भक्तानुकम्पिनं देवं जगत्कारणमच्युतम्।
आविर्भूतं च सृष्ट्यादौ प्रकृतेः पुरुषात्परम्।
एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वरः॥१०॥
नमो व्रातपतये।
नमो गणपतये।
नमः प्रमथपतये।
नमस्तेऽस्तु लम्बोदरायैकदन्ताय विघ्ननाशिने शिवसुताय श्रीवरदमूर्तये नमः॥११॥
🌼 फलश्रुति (पाठ का फल)
एतदथर्वशीर्षं योऽधीते।
स ब्रह्मभूयाय कल्पते।
स सर्वविघ्नैर्न बाध्यते।
स सर्वतः सुखमेधते।
स पंचमहापापात् प्रमुच्यते॥
🙏 नोट:
इसे श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ पढ़ना सर्वोत्तम माना जाता है।
गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ विशेष रूप से संकष्टी चतुर्थी, गणेश चतुर्थी, और शुभ कार्यों से पहले किया जाता है।
द्वादश नाम (Ganesha’s 12 Names):
- वक्रतुण्ड (टेढ़ी सूंड वाले)
- एकदन्त (एक दांत वाले)
- कृष्णपिंगाक्ष (काली-भूरी आंखों वाले)
- गजवक्त्र (हाथी के मुख वाले)
- लम्बोदर (बड़े पेट वाले)
- विकट (विकराल)
- विघ्नराजेन्द्र (विघ्न विनाशक)
- धूम्रवर्ण (धुएँ के समान रंग वाले)
- भालचन्द्र (मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले)
- विनायक (सर्वश्रेष्ठ नायक)
- गणपति (गणों के स्वामी)
- गजानन (हाथी जैसे मुख वाले)
💡 साधना के लिए सुझाव
- दिन: बुधवार गणेश जी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
- अर्पण: उन्हें दूर्वा (घास) और मोदक अत्यंत प्रिय हैं।
- दिशा: पूजा करते समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

